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Monday, 6 May 2019

सामग्री

एक उदास कहानी मुझसे छेड़े गए सभी अभियान भुलवा सकती है
हींग के छौँक की महक मुझे कृतज्ञ आँसू रुलवा सकती है
पिछ्ले खोए के लौटने की उम्मीद जगा
मौसम से लड़ कर खिला एक फूल हाथ पकड़ मुझे उठा सकता है
बंद जाली के कोने से घुसा दुष्ट कबूतर
मुझे ढिठाई, बेहयाई के फ़ायदे गिनवा सकता है
लड़के के रोने से मैं दुनिया के खिलाफ़ तलवार साध सकती हूँ
लड़की के हँसने पर मेरी रुकी साँस आज़ाद हो जाती है
दोस्त की माफ़ी मुझे फिर से जिला देती है
टटोलने भर से इनमें से कुछ तो हाथ लग ही जाता है
एक और खेल के लिए मैं फिर तैय्यार हो जाती हूँ




First published in Jankipul, 12 Mar 2019.





Sunday, 5 May 2019

नियम और शर्तें

अगर तुम दोस्ती के लिए भी
गहरी आँखों की शर्त रखो
तो ये समझे रहना
बहुत सीढ़ियाँ उतर तुम पहुँचोगे
उसके घर तक
 
फिर वहाँ आकर
ऐसी कोई बेवकूफ़ाना हरकत मत कर देना
“लाईट औन कर दें क्या?”
या “तुमने अँधेरा क्यों कर रखा है?”
 
बैठे रहना जैसे पूरी दुनिया में यही होता आया है
और जैसे तुम समझते हो कि अँधेरे में ही
लोग एक-दूसरे से बात करना सीखते हैं
 
फिर ये मत कहना, “कहीं बाहर चलें?”
भात और जल्दी में गरम पानी डाल बढ़ाई गई
पनसोर आलू की सब्ज़ी खा लेना
और सो जाना
 
घड़ी से मत गिनना सुबह होने तक के घंटे
जब वो वापस सीढ़ियाँ चढ़ ऊपर जाने लगे
तुम हल्के से दरवाज़ा लगा
चुपचाप उसके पीछे निकल आना



First published in Jankipul, 12 Mar 2019.




 

Friday, 3 May 2019

जत्था

मुझे भागती हुई औरतों के सपने आते हैं
दीवारों को फाँदते, लगातार हाँफते
थाने के सामने दम भर ठहरते
और फिर से भागते,
याद करके, “ओह, इनसे भी तो भागना था”
ये वो सपना नहीं
जिससे उठकर कहा जाए
“शुक्र है, बस एक सपना था,”
ऐसा सच है
जो कई सपनों को लील गया
मैं जानती हूँ मैं वो सब औरतें हूँ
जानती हूँ वो मुझे बचाने के लिए भागती हैं
अब मैं उनके भीतर से लपक
उनके सामने आ जाना चाहती हूँ
देना चाहती हूँ उनको विराम
चाहती हूँ वो मेरी पीठ और कंधों पर
सवार हो जाएँ
मैं उनको लेकर उस दंभ से चलूँ आगे
जिसके खिलाफ़ हमें चेताया गया था
हर बार जब हमने दृढता दिखाई
एक-एक कदम पर हिले धरती
जगाती उन सभी को
जो उसमें ठूँसी गई थीं
उन के दिल पर रखा एक-एक पत्थर फूटे
फाड़ता हुआ कानों पर पड़े परदे
हमारे दाँत मुँह से कहीं आगे तक निकले हों
गर्भावस्था के दौरान किसी कमज़ोरी से नहीं
इस बार
अधिकार से गड़ने को हर लूटे गए निवाले में
आँखों का काजल फैल चुका हो
नज़रबट्टू बन उन गालों पर
जिन पर कालिख फेंकने वो बढ़े थे
जब उनकी दी गई लाली पोतने से
हमने मना कर दिया था
हम अट्टहास करें, भयावह दिखें, औक्टोपस बनें
शरीर से छोड़ते स्याही की पिचकारियाँ
उन पर साधे
जो संग होली खेलने को व्याकुल थे



First published in Jankipul, 12 Mar 2019.



Wednesday, 1 May 2019

अवसरवाद

आप सोचेंगे
कवियों पर डेडलाइन का बोझ नहीं
पर उन्हें भी
शुष्क शहर में हुई
एक कमज़ोर, टपकती बारिश को
निचोड़ लेना पड़ता है
अकालग्रस्त आश्वस्त नहीं हो सकता
दोबारा सरकारी हेलिकौप्टर वहीं से गुज़रेगा
वो और कवि
दोनों आश्वस्त नहीं हो सकते
उनके आसमान में फिर बादल मँडराएँगे
और वे उस पक्षाघाती दुख के न होंगे
जिसमें न पकड़ी जाएगी कलम,
न उठा ही सकेंगे
राहत सामग्री


First published in Jankipul, 12 Mar 2019.




Monday, 29 April 2019

चींटियाँ

आंदोलन और नुक्कड़ नाटक के पहले,
पेडीक्योर को मुँह चिढ़ाती दरारों के पहले,
मेरे तलवों के नरम बचपन ने जाना था
एक के बाद एक कदम आगे रखकर
लंबी दूरी तय की जा सकती है।
गर्वीले पाँव, शीतल ज़मीन,
लगा चींटियाँ मेरा रास्ता काट रही हैं।
उन्हें बताना पड़ेगा, सोचा,
व्यवस्था में किसकी जगह कहाँ है।
धरती से मिलकर चलनेवालों को
धराशायी करने मेरे पैर ऊपर से नीचे आए।
एक पल में इतना विस्तार था,
उसमें तरल लोहे की महक
और उसके स्त्रोत बिंदु की टीस
दोनों समा गए।
मानना तो ये चाहूँगी
ज़िंदगी के सबक जल्दी सीख लेती हूँ।
ईमानदारी की बात ये है
मेरे गुरु निपुण थे।
अब कोई जीवन में कुछ
बड़ा करने की सलाह देता है,
तो सोचती हूँ
सटीक होना काफ़ी है।


First published in Jankipul, 12 Mar 2019.




Sunday, 28 April 2019

बर्थडे पार्टी, 1990

नई फ्रॉक
और आज घर पर ही
बाहर जानेवाली एकमात्र सैंडल
बाल झाड़ लो ठीक से,
कोई आएगा तो क्या बोलेगा कि
ठीक से बाल भी नहीं झाड़ी है
उधार के कैमरे ने
बच्चों के दाँत
अमरूद में गड़े देखे
आँटियों ने कचौड़ियाँ
खाने से पहले बनाईं
हमलोग कोई गेस्ट हैं क्या?
छोले पर जान छिड़कने के लिए
हर थोड़ी देर में
एक जाँबाज़ प्याज़ तैयार
पेपर प्लेट के बाहर
पाँव पसारता केला
सिंघाड़े से अपनी हीनता
छिपाने की कोशिश में,
ट्राईंग टू हार्ड, इफ़ यू आस्क मी
1. केक
2. खीर (दूध ठीक से ओटिएगा और चावल खाली एक मुट्ठी)
3. गुलाबजामुन
बहुत है, और कितना मीठा रहेगा भाई
गुलाबी कागज़ से निकला
गिफ़्ट लंच बौक्स अभी रख दो
नए क्लास में ले जाना
अभी तो तुम्हारा चल ही रहा है


First published in Jankipul, 12 Mar 2019.


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