Wednesday, 16 April 2014

अधपका

अभी से कैसे परोस दें?
सीझा भी नहीं है।
पर तुम भी तो ढीठ हो,
चढ़ने से पकने तक,
सब रंग देखना होता है तुमको।


First published in Jankipul, 17 April 2014.


1 comment:

हिन्दी आलोचक said...

आपने 'दाग' को मुँह भी न लगाया अफ़सोस
उसको रखता था कलेजे से लगाये कोई

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